निज़ामशाही वंश ( कार्यकाल -147 वर्ष)
निज़ामशाही वंश
निज़ामशाही वंश का आरम्भ जुन्नर में 1490 ई. में अहमद निज़ामशाह (मलिक अहमद) के द्वारा हुआ, जिसने तत्कालीन बहमनी शासक सुल्तान महमूद (1482 से 1518) के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। उसने निज़ामशाह की उपाधि धारण की और उसके द्वारा प्रवर्तित 'निज़ामशाही वंश' 1490 से 1637 ई. तक राज्य करता रहा।
साम्राज्य विस्तार
निज़ामशाही सुल्तानों ने 1499 में दौलताबाद के विशाल क़िले पर क़ब्ज़ा कर लिया। इसके पश्चात् 1637 ई. में सम्राट शाहजहाँ के राज्यकाल में उसे जीतकर मुग़ल साम्राज्य में मिला लिया गया। 1574 ई. में इस वंश ने बरारपर भी अधिकार कर लिया था, परन्तु 1596 ई. में उसे बरार को मुग़ल सम्राट अकबर को दे देना पड़ा।
इस वंश के तृतीय शासक हुसेनशाह ने विजयनगर राज्य के विरुद्ध दक्षिण के मुसलमान राज्यों के गठबंधन में भाग लिया था और 1565 ई. के तालीकोट के युद्ध में विजय प्राप्त करने के उपरान्त विजयनगर के लूटने में भी पूरा हाथ बँटाया। चाँदबीबी, जो मुग़लों के विरुद्ध अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध हुई, निज़ामशाही वंश के सुल्तान हुसैन निज़ामशाह प्रथम (1553 से 1565 ई.) की पुत्री थी। निज़ामशाही वंश का आधुनिक काल में अवशिष्ट स्मारक 'भद्रमहल' है, जो सफ़ेद पत्थरों से निर्मित है और अपनी जीर्णदशा में अहमदनगर में विद्यमान है।
शासकों के नाम
- अहमद निज़ामशाह (1490 - 1506 ई.)
- बुरहान निज़ामशाह प्रथम (1510 - 1553 ई.)
- हुसैन निज़ामशाह प्रथम (1553 - 1565 ई.)
- मुर्तज़ा निज़ामशाह प्रथम (1565 - 1583 ई.)
- हुसैन निज़ामशाह द्वितीय (1583 - 1589 ई.)
- इस्माइल निज़ामशाह (1589 - 1591 ई.)
- बुरहान निज़ामशाह द्वितीय (1591 - 1595 ई.)
- इब्राहिम निज़ामशाह (1595 - 1609 ई.)
- मुर्तज़ा निज़ामशाह द्वितीय (1609 - 1630 ई.)
- बुरहान निज़ामशाह तृतीय (1630 - 1632 ई.)
- हुसैन निज़ामशाह तृतीय (1632 - 1636 ई.)
अहमद निज़ामशाह
- अहमद निज़ामशाह का असली नाम मलिक अहमद था। वह कुछ वर्षों तक बहमनी वंश के सुल्तान महमूद के अधीन पूना के निकट जुन्नर का हाकिम रहा।
- वह बीदर के दक्खिनी मुसलमानों के दल के नेता निज़ामुल मुल्क बहरी का बेटा था जिसने बहमनी सुल्तान के वज़ीर मुहम्मद गवाँ को 1841 ई. में क़त्ल करवा दिया।
- अपने पिता की मृत्यु के बाद मलिक अहमद ने बहमनी राज्य के आख़िरी सुल्तान महमूद (1482-1518 ई.) को हराकर अपने स्वतन्त्र राज्य की स्थापना की और अपनी राजधानी का नाम अहमदनगर रखा।
- उसने अपना नाम अहमद निज़ामशाह और अपने राजवंश का नाम निज़ामशाही रखा। 1499 ई. में उसने देवगिरी अथवा दौलताबाद क़िले को जीतकर उस पर अपना अधिकार कर लिया और इस प्रकार अपने राज्य को मज़बूत बनाया।
- उसने 1506 ई. तक राज्य किया। उसकी मृत्यु 1508 ई. में हुई।
बुरहान निज़ामशाह प्रथम
- बुरहान निज़ामशाह प्रथम निज़ामशाही वंश का द्वितीय सुल्तान था।
- इसने 1510 से 1553 ई. तक शासन किया था।
- अपने 43 वर्ष के लम्बे शासनकाल में वह मुख्यत: युद्धों में ही व्यस्त रहा।
- यह सन्धि अधिक समय तक नहीं टिक सकी।
- बुरहान निज़ामशाह प्रथम मूल रूप 'सुन्नी' मुसलमान था।
- अपने जीवन के अन्तिम दिनों में वह 'शिया' हो गया था।
हुसैन निज़ामशाह प्रथम
- हुसैन निज़ामशाह प्रथम अहमदनगर के निज़ामशाही वंश का तीसरा सुल्तान था।
- उसने 1553 से 1565 ई. तक राज्य किया था।
- हुसैन निज़ामशाह प्रथम का शासनकाल दक्कन के इतिहास में एक युगांतकारी युग के रूप में स्वीकार किया जाता है।
- उसने विजयनगर साम्राज्य कि विरुद्ध गोलकुण्डा और बीजापुर के सुल्तानों से सुलह कर ली थी।
- बीजापुर के आदिलशाह, गोलकुण्डा के कुली कुतुबशाह और विजयनगर के रामराय की संयुक्त सेना ने अहमदनगर के प्रदेशों पर आक्रमण करके लूटपाट की थी।
- हुसैन निज़ामशाह प्रथम इस लूटपाटपूर्ण व्यवहार से इतना क्षुब्ध हुआ कि, उसने 1565 ई. में विजयनगर के विरुद्ध दक्कन के मुस्लिम राज्यों के एक मुस्लिम संगठन की स्थापना की।
- बरार इस संगठन में शामिल नहीं था।
- इस संगठन ने 1565 ई. में तालीकोटा के युद्ध में विजयनगर को बुरी तरह से परास्त किया।
- इस विजय कि फलस्वरूप विजयनगर को बुरी तरह से लूटा गया और उसे तहस-नहस कर दिया गया।
- इस विजय से हुसैन निज़ामशाह प्रथम कोई लाभ नहीं उठा पाया।
- जिस साल उसने विजयनगर पर विजय प्राप्त की, उसी वर्ष उसकी मृत्यु हो गई।
मुर्तज़ा निज़ाम शाह प्रथम
| यह लेख की आधार अवस्था ही है, आप इसको तैयार करने में सहायता कर सकते हैं। |
मुर्तज़ा निज़ाम शाह प्रथम अहमदनगर के निज़ामशाही वंशका चौथा सुल्तान था, जिसने 1565 से 1583 ई. तक राज्य किया। अपने राज्यकाल के प्रथम 6 वर्षों में उसने सारा शासन प्रबन्ध अपनी माता के हाथों में छोड़ दिया। बाद में उसने यथेष्ट सक्रियता दिखलायी और बरार को विजय कर लिया, किन्तु बीदर पर अधिकार करने में वह असफल रहा। उपरान्त वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठा और उसके पुत्र हुसैन, जो उसके बाद सिंहासनासीन हुआ, उसका वध कर दिया।
हुसैन निज़ामशाह द्वितीय
- हुसैन निज़ामशाह द्वितीय अहमदनगर के निज़ामशाही वंश का 5वाँ सुल्तान था।
- उसने 1583 से 1589 ई. तक शासन किया था।
इस्माइल निज़ामशाह
- इस्माइल निज़ामशाह अहमदनगर के निज़ामशाही वंश का 6वाँ सुल्तान था।
- उसने 1589 से 1591 ई. तक राज्य किया था।
- इस प्रकार उसका शासन काल अल्पायु था।
बुरहान निज़ामशाह द्वितीय
- बुरहान निज़ामशाह द्वितीय अहमदनगर के निज़ामशाही वंश का 7वाँ सुल्तान था।
- उसका शासन काल 1591 से 1595 ई. तक माना जाता है।
- प्रसिद्ध लेखक 'शाह ताहिर' इसी के शासन काल में था।
इब्राहिम निज़ामशाह
- इब्राहिम निज़ामशाह अहमदनगर के निज़ामशाही वंश का 8वाँ सुल्तान था।
- उसने 1595 से 1609 ई. तक राज्य किया था।
मुर्तज़ा निज़ामशाह द्वितीय
- मुर्तज़ा निज़ामशाह द्वितीय अहमदनगर के निज़ामशाही वंश का 9वाँ सुल्तान था।
- उसने केवल एक वर्ष (1609 से 1630 ई.) तक ही शासन किया था।
- शासन प्रबन्ध में मलिक अम्बर उसका प्रधान सहायक था।
- उसके राज्य का अधिकांश भू-भाग मुग़लों ने उससे छीन लिया था, जिनके साथ उसका बराबर युद्ध होता रहता था।
- 1630 ई. में उसके मन्त्री 'फ़तेह ख़ाँ' ने उसका वध कर दिया।
बुरहान निज़ामशाह तृतीय
- बुरहान निज़ामशाह तृतीय अहमदनगर के निज़ामशाही वंश का 10वाँ सुल्तान था।
- उसने 1630 से 1632 ई. तक शासन किया था।
- उसके शासन काल में निज़ामशाही वंश पतन की ओर अग्रसर हो गया।
हुसैन निज़ामशाह तृतीय
- हुसैन निज़ामशाह तृतीय अहमदनगर के निज़ामशाही वंश का 11वाँ और आख़िरी सुल्तान था।
- उसका शासन काल 1632 से 1636 ई. तक माना जाता है।
Comments
Post a Comment